प्रेस नोट

29 June 2025

*भगवद् संबंध का बोध करवाते हैं गुरुदेव : स्वामी राजेंद्र दास*

*श्रीमद् भागवत कथा का गोंदपुर जयचंद में भव्य समापन*

*उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने क्षेत्रवासियों का जताया आभार*

ऊना, 29 जून। हरोली उपमंडल के गोंदपुर जयचंद में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा एवं ज्ञान महायज्ञ रविवार को दिव्य वातावरण और भावपूर्ण पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री द्वारा अपनी धर्मपत्नी स्वर्गीय प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री की पुण्य स्मृति में करवाया गया।कथा के अंतिम दिवस पर कथा व्यास परम पूज्य जगतगुरु स्वामी श्री राजेंद्र दास देवाचार्य जी महाराज ने श्रीकृष्ण पुत्र प्रद्युम्न जन्म कथा, स्यमंतक मणि प्रसंग, परीक्षित मोक्ष संवाद और भागवत श्रवण महात्म्य जैसे प्रसंगों के माध्यम से जीवन के गूढ़ संदेश प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि मानव जीवन को आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर करने वाला परम मार्गदर्शक है।स्वामी जी ने तामसिक जीवनशैली पर भी चेताया और मांसाहार को आत्मिक अधोगति का कारण बताया। उन्होंने कहा कि आज का समाज भौतिकता की दौड़ में मूल्यों से विमुख होता जा रहा है, जिसे केवल आध्यात्मिकता ही पुनः संतुलित कर सकती है।  उन्होंने कहा कि जीव का नित्य सम्बन्ध परमात्मा से है, लेकिन माया के जाल में फंस कर वह भगवद संबंध को विस्मृत कर देता है। उस शाश्वत सम्बद्ध का बोध गुरुदेव करवाते  हैं। उन्होंने माता को ही प्रथम और श्रेष्ठ गुरु बताया जो जीवन को सही दिशा देती है। श्रीमद् भागवत कथा के समापन के उपरांत गोन्दपुर में परम पूज्य स्वामी श्री राजेन्द्र दास देवाचार्य जी महाराज  के पावन कर कमलों द्वारा एक वट वृक्ष का पौधा रोपित किया गया। उन्होंने स्वर्गीय डॉ. सिम्मी अग्निहोत्री द्वारा अपनी सुपुत्री डॉ. आस्था अग्निहोत्री को व्यावहारिक ज्ञान के साथ प्रदान किए आध्यात्मिक ज्ञान और परमार्थ के रास्ते पर चलने की सीख की भूरि भूरि प्रशंसा की।समापन अवसर पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने स्वामी श्री राजेंद्र दास जी महाराज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सप्ताह उनके जीवन का अत्यंत पावन, शांतिपूर्ण और प्रेरणादायक अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि स्वामी जी के सान्निध्य में इस कथा को सुनना उनके समेत सभी क्षेत्रवासियों और अन्यान्य स्थलों से आए श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक सौभाग्य रहा। उन्होंने आयोजन में योगदान देने वाले श्रद्धालुओं, संतजनों और सहयोगियों का भी विशेष आभार जताया।उपमुख्यमंत्री की सुपुत्री डॉ. आस्था अग्निहोत्री ने भी इस अवसर पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्हें मां ने हमेशा जीवन के हर मोड़ पर सही राह दिखाई, यही उनकी सबसे बड़ी विरासत है। उन्होंने कथा व्यास महाराज जी के प्रति कृतज्ञता जताते हुए आयोजन में पधारे सभी श्रद्धालुओं का धन्यवाद किया।समापन अवसर पर स्वामी कृष्णानंद जी महाराज व अन्य संत समाज के साथ साथ राजनीतिक और समाज जीवन के अनेक ख्यातिलब्ध गणमान्यजन उपस्थित रहे। इस मौके स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, विधानसभा उपाध्यक्ष विनय कुमार, श्री ज्वालामुखी के विधायक संजय रत्न,दून के विधायक राम कुमार चौधरी, चम्बा के विधायक नीरज नैयर, नालागढ़ के विधायक हरदीप सिंह बावा, श्री चिंतपूर्णी के विधायक सुदर्शन सिंह बबलू, पूर्व मंत्री एवं  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर, पूर्व मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता राकेश पठानिया, पूर्व विधायक अजय महाजन, एचआरटीसी उपाध्यक्ष अजय वर्मा सहित अनेक गणमान्य अतिथियों और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को भव्यता प्रदान की।

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श्रीमद् भागवत कथा में बही आध्यात्मिक-सामाजिक समरसता की रसधार, स्वामी राजेंद्र दास बोले…दस पुत्रों के समान होती है एक कन्या

*नारी सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का दिया पावन संदेश*

ऊना, 28 जून। हरोली उपमंडल के गोंदपुर क्षेत्र में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के छठे दिवस पर भक्तिमय वातावरण में धर्म, भक्ति एवं अध्यात्म की वर्षा हुई। यह सात दिवसीय कथा हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री मुकेश अग्निहोत्री द्वारा अपनी धर्मपत्नी स्वर्गीय प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री की पुण्य स्मृति में आयोजित की जा रही है।कथाव्यास जगतगुरु स्वामी श्री राजेंद्र दास देवाचार्य जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण, श्री राधारानी एवं बाल सखाओं की लीलाओं का सुंदर वर्णन करते हुए जीवन मूल्यों एवं सामाजिक सरोकारों की ओर ध्यान आकर्षित किया।स्वामी जी ने कहा कि शास्त्रों में “दश पुत्र सम कन्या” कहा गया है, अर्थात् एक कन्या दस पुत्रों के समान होती है। वर्तमान समय में भी कई परिवारों में पुत्र-पुत्री के बीच भेदभाव देखा जाता है, जबकि बेटियां न केवल शिक्षा में आगे हैं, बल्कि माता-पिता की सेवा-संवेदना में भी अग्रणी रहती हैं।उन्होंने कहा कि एक वृक्ष की तुलना दस कन्याओं के समान पुण्यदायी मानी गई है। तालाबों व जलस्रोतों के किनारे पीपल, वट, आम जैसे वृक्ष लगाने से न केवल पर्यावरण संतुलित होता है, बल्कि यह असंख्य प्राणियों को आश्रय भी प्रदान करता है।स्वामी जी ने बताया कि इस क्षेत्र में पहले पेयजल की भारी समस्या थी, जिसके चलते यहां विवाह संबंधों में भी संकोच होता था। लेकिन आज क्षेत्र के कर्मठ नेतृत्व श्री मुकेश आअग्निहोत्री व उनके  योजनाबद्ध प्रयासों से यह क्षेत्र जल समृद्ध हो गया है, और अनेक तालाबों का निर्माण कर उनमें जल संचयन सुनिश्चित किया गया है।उन्होंने कहा कि जलाशयों के चारों ओर वृक्षारोपण से जल स्तर में वृद्धि हुई है और यह प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।स्वामी जी ने उपमुख्यमंत्री श मुकेश अग्निहोत्री से आग्रह किया कि श्रीमद् भागवत कथा के समापन अवसर पर एक वट वृक्ष का रोपण स्वर्गीय सिम्मी अग्निहोत्री जी की स्मृति में किसी सार्वजनिक स्थान पर किया जाए, जिससे यह कथा युगों तक स्मरणीय बनी रहे। साथ ही, उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से भी कम से कम एक वृक्ष लगाने का संकल्प लेने का अनुरोध किया।स्वामी जी ने कहा कि हर व्यक्ति को परिश्रमी होना चाहिए, और समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं सबको समान रूप से मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति स्वयं मेहनत नहीं करता, उसे मुफ्त में सहायता देना राष्ट्र के विकास में बाधा उत्पन्न करता है।इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, उनकी सुपुत्री डॉ. आस्था अग्निहोत्री, विधायक सतपाल सत्ती, कुलदीप राठौर, विवेक शर्मा एवं उनकी धर्मपत्नी, राकेश कालिया, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संदीप शर्मा, हिमाचल प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान सहित अनेक विशिष्ट अतिथि एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे और कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।

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भगवान की शरणागति से मिलता है सच्चा सुख : स्वामी राजेंद्र दास

ऊना, 27 जून।
हरोली उपमंडल के गोंदपुर क्षेत्र में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के पांचवे दिवस पर दिव्य वातावरण में धर्म, भक्ति और आध्यात्म की अमृतवर्षा हुई। यह सात दिवसीय कथा उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री द्वारा अपनी धर्मपत्नी स्वर्गीय प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री की पुण्य स्मृति में आयोजित की जा रही है।

कथावाचक जगतगुरु स्वामी राजेन्द्र दास देवाचार्य जी महाराज ने अपने दिव्य प्रवचनों में कहा कि यह कथा पवित्र आषाढ़ मास में हो रही है, जो श्रवण के लिए अत्यंत पुण्यदायी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्व. प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री अपने दिव्य स्वरूप में इस भागवत कथा को श्रवण कर रही हैं और कथा पूर्ण होने के उपरांत वे उस नित्यधाम में प्रतिष्ठित होंगी, जहां से कोई जीव वापस नहीं आता। स्वामी जी ने भगवान से प्रार्थना की कि भक्तिमति सिम्मी जी को अपने चरणों में नित्य स्थान प्रदान करें, और उनकी अधूरी इच्छाओं को उनकी सुपुत्री डॉ. आस्था अग्निहोत्री पूर्ण करें।

स्वामी जी ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भजन-कीर्तन के माध्यम से रसपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जीवन में कोई भी कार्य असंभव नहीं है यदि मनुष्य भगवान की शरण में चला जाए। गुरु वचन दिव्य होते हैं, और उनका पालन जीवन को सार्थक बनाता है। उन्होंने चारों युगों के धामों—सतयुग का बद्रीनाथ, त्रेता का रामेश्वरम, द्वापर का द्वारका और कलियुग का श्रीजगन्नाथ धाम—की महत्ता पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि सच्चा शरणागत भक्त दुख में विचलित नहीं होता और सुख में अहंकार नहीं करता। ऐसा भक्त संसार की नाशवान वस्तुओं में मोह नहीं करता और उसमें ब्रह्म ज्योति का उदय होता है। उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता या गुरु की सीख नहीं सुन सकता, उसका उद्धार स्वयं भगवान भी नहीं कर सकते।

स्वामी जी ने उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री द्वारा नगनोली में लगभग 400 एकड़ भूमि पर बन रहे  गौ अभयारण्य   की सराहना करते हुए इसे अत्यंत पुण्य कार्य बताया। उन्होंने कहा कि गौ सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती और इस कथा का आयोजन भी तभी सार्थक हुआ जब यह पावन भूमि इस पुण्य कार्य की साक्षी बनी।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, उनकी सुपुत्री डॉ. आस्था अग्निहोत्री, राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री रैंक के केहर सिंह खाची सहित कई गणमान्य अतिथि, स्थानीय जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक शांति और सत्संग का लाभ प्राप्त किया।

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