प्रेस नोट

30 मार्च 2024

दिलों में संघर्ष, सेवा और सहयोग की प्ररेणा लिए मुबारकपुर पहुंची डॉ. आस्था और मुकेश अग्निहोत्री की पदयात्रा

बढ़ते कदमों को नहीं रोक पाए बारिश-तूफान

पैरों में छाले, पिता ने निभाया मां का फर्ज

हर जगह लोगों का हुजूम, साथ को जुटे हजारों हाथ

कल माता चिंतपूर्णी मंदिर में दर्शन के साथ संपन्न होगी पदयात्रा

ऊना, 30 मार्च।

दिलों में संघर्ष, सेवा और सहयोग की अनंत प्ररेणा लिए डॉ. आस्था और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की पदयात्रा विभिन्न पड़ावों से होते हुए दूसरे दिन मुबारकपुर पहुंची। स्वर्गीय प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री के जीवन पर्यंत समर्पण और उनके निस्वार्थ सेवा भाव के सम्मान को अर्पित इस पदयात्रा में हर जगह लोगों का हुजूम रहा, वहीं इस दौरान स्नेह और साथ देने के भाव से हजारों हाथ सहयोग में जुटे दिखे।

बता दें, डॉ. आस्था अपने पिता मुकेश अग्निहोत्री के साथ अपनी मां स्वर्गीय प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री की आत्मिक शांति के साथ साथ सभी के लिए माता चिंतपूर्णी का आशीर्वाद लेने की मंगलकामना के साथ माता चिंतपूर्णी मंदिर के लिए पदयात्रा पर निकली हैं।

पैरों में छाले, पिता ने निभाया मां का फर्ज

बढ़ते कदमों को नहीं रोक पाए बारिश-तूफान

शुक्रवार को आस्था कुंज गोंदपुर जयचंद हरोली से आरंभ हुई यह पदयात्रा पहले दिन रात्रि ठहराव क लिए खड्ड में रूकी थी। वहां से शनिवार प्रातः यात्रा आरंभ की तो बारिश-तूफान रास्ते की बाधा बन कर सामने थे। पर प्रो. सिम्मी की अधूरी इच्छा को पूरा करने के संकल्प को लेकर फौलादी इरादों से आगे बढ़ते कदमों को कोई बाधा नहीं रोक पाई। इस पदयात्रा में मुकेश अग्निहोत्री पिता के साथ साथ बेटी आस्था के लिए मां का फर्ज भी निभाते दिखे। उन्होंने बेटी के पैरों में निकल आए छालों पर बड़े लाड से मरहम लगाया और हर बाधा को पीछे छोड़ बढ़ते चले जाने का हौंसला दिया।

बेटी के संकल्प में सहयोगी होकर चल रहा हूं साथ – मुकेश अग्निहोत्री

स्नेह और आशीर्वाद के लिए जनता जनार्दन का आभार

वहीं उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि वे बेटी के संकल्प में सहयोग करने की भावना से उनके साथ पदयात्रा में चल रहे हैं। यह आस्था का जज्बा और हिम्मत ही है कि वे अपनी मां के लिए इस तरह की पदयात्रा पर निकली हैं। इस कठिन समय में जनता का जिस प्रकार का स्नेह और साथ हमें मिल रहा है, उसके लिए जितना आभार जताएं कम होगा। यह पदयात्रा प्रो. सिम्मी के समर्पण और उनके निस्वार्थ सेवा भाव के सम्मान की यात्रा है।

बता दें, प्रो. सिम्मी अपने पति प्रदेश के उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की चुनावी जीत पर हर बार माता चिंतपूर्णी की पदयात्रा करती थीं। उन्होंनेे पांच बार नंगे पांव यह पदयात्रा की थी। इस बार भी वे पति की चुनावी जीत के बाद माता चिंतपूर्णी के मंदिर नंगे पांव माथा टेकने पहुंची थीं। इस वर्ष भी 12 फरवरी को घर पर माता रानी का जागरण रखा हुआ था परंतु जागरण से पहले ही वो हमें छोड़ कर चले गई।

डॉ.आस्था बोलीं…ये हमारे लिए भावुक पल, जनता का प्यार बना है संबल

डॉ. आस्था ने कहा कि यह पदयात्रा उनके और उनके पिता के लिए भावुक पल है। पहले उन्होंने मां सिम्मी अग्निहोत्री के साथ यह पदयात्रा की थी। अब मां सशरीर तो साथ नहीं हैं पर उनका आशीर्वाद और प्ररेणा निरंतर साथ है। यही उनका बल है। इस समय में जनता का अथाह प्यार उनका संबल बना है।

दूसरे दिन यहां से गुजरी पदयात्रा, कल माता चिंतपूर्णी मंदिर में दर्शन के साथ होगी संपन्न

पदयात्रा के दूसरे दिन डॉ. आस्था अपने पिता मुकेश अग्निहोत्री तथा स्वेच्छा से बड़ी तादाद में साथ चले लोगों के संग भदसाली, ईसपुर, पंडोगा, पंजावर, नगनोली, गुग्लैहड़, बढेडा राजपूतां, जाडला, लोहारली, चरूड़ू और अंब से होते हुए मुबारकपुर पहुंचीं। यात्रा में हर आमोखास के साथ साथ चिंतपूर्णी के विधायक सुदर्शन सिंह बबलू, ऊना के पूर्व विधायक सतपाल रायजादा, जिला ऊना कांग्रेस के अध्यक्ष रणजीत सिंह राणा, ऊना यूथ कांग्रेस अध्यक्ष राधव ठाकुर समेत राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की अनेक हस्तियां भी शामिल हुईं।

यह पदयात्रा रविवार को प्रातः मुबारकपुर से आंरभ होकर माता चिंतपूर्णी मंदिर में दर्शन के साथ संपन्न होगी। .0.

Media Coverage.

30 March 2024

प्रेस नोट


होनहार बेटी ने मां की अधूरी इच्छा को बनाया संकल्प

माता चिंतपूर्णी का आशीर्वाद लेने हरोली से पैदल यात्रा पर निकलीं डॉ. आस्था, पिता मुकेश अग्निहोत्री भी साथ

आस्थामयी यात्रा में जुड़ते गए हजारों
ऊना, 29 मार्च।

स्वर्गीय प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री की अधूरी इच्छा को संकल्प बना कर उनकी बेटी डॉ. आस्था अग्निहोत्री अपने पिता प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के साथ माता चिंतपूर्णी का आशीर्वाद लेने हरोली से पैदल यात्रा पर निकलीं। गुड फ्राइडे के दिन उन्होंने गोंदपुर जयचंद में अपने निवास से सुबह करीब 8 बजे चिंतपूर्णी मंदिर के लिए यह पैदल यात्रा आरंभ की और देखते ही देखते हजारों की तादाद में लोग उनके साथ सहयात्री हो गए।

बता दें, प्रो. सिम्मी माता चिंतपूर्णी की अनन्य भक्त थीं। अपने पति प्रदेश के उपमुख्यमंत्री की हर चुनावी जीत के बाद वे घर से पैदल माता के दरबार माथा टेकने जाती थीं। उन्होंने 12 फरवरी को हरोली में अपने घर पर माता चिंतपूर्णी का जगराता रखा था। इसी सिलसिले में हेग अकादमी ऑफ लॉ से उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहीं उनकी इकलौती बेटी डॉ. आस्था अग्निहोत्री भी घर आई थीं। मगर दुर्भाग्य से जगराते से दो दिन पहले फरवरी महीने की 9 तारीख को प्रो. सिम्मी का अकस्मात निधन हो गया। उनकी अधूरी इच्छा को अपनी प्रेरणा बना कर उनकी होनहार बेटी डॉ. आस्था अपने पिता के साथ भावुकता से भरी इस आस्थामयी पैदल यात्रा पर निकलीं हैं।

लोग साथ आते गए, कारवां बनता गया…

अपार जनता, अनगिनत भाव
‘मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर, लोग साथ आते गए कारवां बनता गया’, किसी शायर के ये अशआर भावों से भरी इस आस्थामयी यात्रा के लिए सटीक बैठते दिखे। डॉ. आस्था और मुकेश अग्निहोत्री के साथ चलने वालों की संख्या हर बीतते पड़ाव के साथ बढ़ती चली गई। हरोली समेत ऊना जिले के विभिन्न क्षेत्रों से हर वर्ग, हर तबके से लोग यात्रा में जुड़े। यह यात्रा जहां से भी गुजरी पड़ाव दर पड़ाव कारवां बढ़ता चला गया। अनेकों लोग सुख दुख के साथी होने के भाव से यात्रा में जुड़े, तो बहुत से लोग एक होनहार बेटी के जज्बे को सराहने, उनका साथ देने, समर्थन देने और हौंसला देकर यात्रा में सहयात्री होने आए। अनेकों बड़े-बुजुर्गों ने बेटी को सस्नेह आशीर्वाद देने के भाव से यात्रा में भाग लिया।

पूर्व मंत्री कुलदीप कुमार, पूर्व विधायक राकेश कालिया समेत राजनीतिक जगत के साथ साथ सामाजिक क्षेत्र के हर तबके के लोग भी इस यात्रा में शामिल हुए।

डॉ. आस्था ने जनता के साथ-स्नेह के लिए जताया आभार
इन भावुक क्षणों में डॉ. आस्था अग्निहोत्री ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी मां प्रो. सिम्मी अग्निहोत्रा खुशी-खुशी माता के दरबार पैदल यात्रा करती थीं। पर हम गम में यात्रा कर रहे हैं। उनकी इच्छा थी कि घर में माता का जगराता हो और सभी को माता का आशीर्वाद मिले। पर वो इच्छा अधूरी रह गई। हम उसी अधूरी इच्छा को पूरा करने और सभी के लिए माता का आशीर्वाद लेने के लिए जा रहे हैं।
उन्होंने सहयोगी बन यात्रा में जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का आभार व्यक्त किया और जनता के साथ तथा स्नेह के लिए कृतज्ञता जताई।

पहले दिन यहां से गुजरी यात्रा
शुक्रवार को आस्था कुंज गोंदपुर जयचंद से आरंभ हुई पैदल यात्रा गोंदपुर बुल्ला, भड़ियारा, दुलेहड, हीरानगर, हीरा, हलेडा, पुबोवाल, ठाकरा, पालक्वाह, भदौड़ी, हरोली, समनाल, रोड़ा, सैंसोवाल, धर्मपुर, कांगड़, बढेडा, सलोह, घालूवाल, भदसाली, ईसपुर, पंडोगा होते खड्ड पहुंची। खड्ड में रात्रि ठहराव के बाद शनिवार को यात्रा यहां से आगे बढ़ेगी।
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Danik Savera

18 March 2024

प्रेस नोट

17 मार्च 2024

अपनी लाडली बेटी प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री को मंडी वासियों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

हजारों की तादाद में उमड़े लोग, याद में छलके आंसू

मंडी, 17 मार्च। मंडी की लाडली बेटी, उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की धर्मपत्नी प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री की याद में रविवार को मंडी के भीमाकाली मंदिर परिसर में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस मौके मुकेश अग्निहोत्री और उनकी बेटी डॉ. आस्था अग्निहोत्री को ढांढस बंधाने, दुख की घड़ी में साथ होने का भाव लेकर हजारों की तादाद में उमड़े मंडी वासियों ने प्रो. सिम्मी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी स्मृतियों के जिक्र पर वहां उपस्थित हर व्यक्ति की आंख डबडबाई रही। प्रो. सिम्मी के अपनत्व भरे व्यक्तित्व की याद में परिचितों के खूब आंसू छलके।


बता दें, मंडी शहर प्रो. सिम्मी का मायका था, उनके पिता का घर शहर के भगवाहन मोहल्ले में है। यहीं उनका बचपन बीता, यहीं युवा अवस्था के सपने बुने। बचपने की नादानियों से लेकर जीवन की शीर्ष सफलताओं तक मंडी और मंडी वासियों की अपनी लाडली बेटी प्रो. सिम्मी से जुड़ी अनेकों सुरभित स्मृतियां हैं। प्रो. सिम्मी का 9 फरवरी को अकस्मात निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार उनके ससुराल हरोली के गोंदपुर जयचंद में किया गया था।


जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए…
प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री ने अल्प अवधि में बड़ा जीवन जिया। वर्ष 1968 में मंडी शहर के भगवाहन मोेहल्ले में जन्मी सिम्मी बचपन से ही अध्ययनशील थीं। स्वभाव में चुलबुली सिम्मी पढ़ने में सबसे आगे रहती थीं। कुशाग्र बुद्धि सम्पन्न सिम्मी ने छोटी आयु में पीएचडी की पढ़ाई पूरी की और वर्ष 1996 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पढ़ाने लगीं ।
बहुआयामी प्रतिभा की धनी प्रो. सिम्मी विद्यालय शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपनी बहुआयामी प्रतिभा के सशक्त हस्ताक्षर दर्ज करवाती रहीं। खेलों में भागीदारी से लेकर गायन,नाटक और नृत्य की, हर विधा में अग्रणी रहना तथा हर किरदार उत्कृष्टता से जीना उनके व्यक्तित्व का हिस्सा था । सबसे मिलना-जुलना, खूब बातें करना और जिन्दगी को जिंदादिली से जीना, ये उनकी शख्सियत की पहचान थी।

विद्यार्थियों की चहेती, उत्कृष्ट शिक्षाविद थीं प्रो.सिम्मी
उत्कृष्ट शिक्षाविद प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री विद्यार्थियों की चहेती थीं। उनके मार्गदर्शन में 50 से अधिक विद्यार्थियों ने एफफिल-पीएचडी शोध किए। प्रो. सिम्मी को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए बेस्ट टीचर अवॉर्ड, वूमन अचीवर अवॉर्ड एवं नारी शक्ति अवॉर्ड से भी नवाजा गया था । उनकी लिखी एक पुस्तक का विमोचन गत दिनों प्रदेश के माननीय राज्यपाल के करकमलों से सम्पन्न हुआ था।

सामाजिक सरोकार की पैरोकार
प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री समाज सेवा के कार्य में भी लगातार सक्रिय थीं । वे आस्था फाउंडेशन के नाम से एक एनजीओ का संचालन कर रही थीं । इसके माध्यम से वे नशे के खिलाफ आंदोलन, सड़क सुरक्षा अभियान समेत हर सामाजिक कार्य आगे बढ़कर योगदान देती रहीं।

इरादों की अटल…पति की जीत पर हर बार नंगे पांव पहुंची

वे इरादों की ऐसी अटल थीं कि लगातार 5 बार विधायक के रूप में रिकार्ड मतों से विजयी रहे मुकेश अग्निहोत्री की पांचों जीत में हर बार निर्णायक भूमिका निभाई। हर जीत के बाद वे नंगे पांव माता ज्वालामुखी, बगुलामुखी मंदिर शीश नवाने घर से पैदल पहुंचतीं।


असाधारण व्यक्तित्व की धनीं मेरी मां – डॉ. आस्था

हर भूमिका सफलापूर्वक निभाती रहीं मंडी की बेटी
प्रो.सिम्मी एवं मुकेश अग्निहोत्री की इकलौती बेटी, हेग अकादमी ऑफ इंटरनेशनल लॉ से उच्चतर शिक्षा प्राप्त कर रहीं, डॉ. आस्था अग्निहोत्री ने प्रार्थना सभा में उपस्थित रहे सभी लोगों का आभार जताया।
उन्होंने कहा कि उनकी मां प्रो. सिम्मी असाधारण व्यक्तित्व की धनी थीं। बहुप्रतिभाशाली, नेकदिल और दूसरों के प्रति समर्पित थीं। उनकी मां के जाने के बाद पूरे प्रदेश में जिस प्रकार की दुख की अभिव्यक्ति देखने को मिली वह उनकी महान शख्सियत को जाहिर करता है।
उन्होंने कहा कि मंडी की बेटी प्रो. सिम्मी ने अपनी प्रतिभा, जिंदादिली से दूसरों की निस्वार्थ सेवा और समर्पण से हरोली का दिल जीत लिया था। मंडी की बेटी प्रो. सिम्मी एक सफल बहु और मां के रूप में सफल भूमिका निभाती रहीं।

डॉ आस्था ने कहा कि उनके पिता श्री मुकेश अग्निहोत्री के पांच बार चुनाव जीतने में प्रो. सिम्मी का त्याग और समर्पण शामिल था।
उनके फौलादी इरादे इस बात से जाहिर होते कि हर बार चुनाव जीतने के बाद वे माता चिन्तपुर्णी और कुलदेवी ज्वालाजी के मन्दिर में नंगे पांव पहुंचती और वहां नतमस्तक होतीं।

हमेशा सुनाती थीं मंडी के किस्से
डॉ. आस्था ने बताया कि उनकी मां हमेशा मंडी के किस्से सुनाती थीं । मंडी का उनके जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान था। यहां के लोग उनके दिल के बहुत करीब थे। वे अपने रिश्तेदारों, सहपाठियों, सहेलियों के साथ की शरारतों के किस्से सुनाती थीं। मंडी से ही उनमें शिक्षा और ज्ञान की लौ जलीं । प्रो. सिम्मी का जाना उनके जीवन के लिए ही नहीं बल्कि अनगिनत जीवन के लिए अपूर्णीय क्षति है।

ये रहे उपस्थित
पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर, पूर्व मंत्री एवं विधायक अनिल शर्मा, रंगीला राम राव, प्रकाश चौधरी, सीपीएस आशीष बुटैल, सुंदर सिंह ठाकुर, विधायक चंद्रशेखर, एचआरटीसी निदेशक मंडल के सदस्य धमेंद्र धामी और विकास कपूर, नगर निगम महापौर विरेंद्र भट्ट, चंपा ठाकुर, नरेश चौहान, कांग्रेस उपाध्यक्ष श्री महेश्वर सिंह चौहान, महासचिव शशी शर्मा, प्रदेश सचिव जगदीश सचिव, राकेश चौहान, जिला कार्यकारी अध्यक्ष हरेंद्र सेन, कांग्रेस की जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी, परिजनों, परिचितों और मंडी जिले के कोने कोने से आए लोगों ने प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

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